चलना
अपनी गति से — पड़ोस, पार्क या छत पर चक्कर।
शांत चाल भारत में कोमल गतिविधि के बारे में है — धीमी सैर, हल्की खिंचाव और खुली हवा, आपकी अपनी रफ़्तार से।
जल्दबाज़ी या तुलना की ज़रूरत नहीं। बस कुछ मिनट जो दिन को हल्का महसूस कराएँ।
हमसे संपर्क करेंयह एक सूचनात्मक साइट है — कोई व्यायाम कार्यक्रम या चिकित्सा सलाह नहीं। हम धीमी सैर, साधारण हरकत और बाहर बिताए समय की बात करते हैं।
दिल्ली की सड़क से लेकर जयपुर की गलियों, मुंबई के समुद्र किनारे से बैंगलोर के पार्क तक — हर जगह अपनी लय होती है।
लोधी गार्डन, क्यूबन पार्क या अपने मोहल्ले की गली — जहाँ हवा ताज़ी लगे। पंद्रह मिनट भी काफ़ी हैं।
सुबह की हल्की रोशनी में कदम धीमे रखें, साँस सामान्य रखें। कोई लक्ष्य दूरी नहीं — बस चलना अच्छा लगे।
कुर्सी पर बैठकर कंधे उठाएँ और धीरे छोड़ें। गर्दन को दाएँ-बाएँ हल्के से घुमाएँ — ज़ोर न लगाएँ।
बारिश या गर्मी में बाहर न जा पाएँ तो बालकनी या कमरे में कुछ मिनट की हरकत भी ठीक है।
अपनी गति से — पड़ोस, पार्क या छत पर चक्कर।
खुली जगह पर कुछ मिनट — शहर या गाँव, जहाँ संभव हो।
कंधे और गर्दन — धीरे, बिना दर्द के।
मिनट — शुरुआत के लिए अक्सर काफ़ी
बार प्रति सप्ताह — या जितना सुविधा हो
शांत जगह — जहाँ आप आराम से चल सकें
«मैं शाम को अपने मोहल्ले में पंद्रह मिनट चलता हूँ — कोई लक्ष्य नहीं, बस हवा बदल जाती है।»— राजेश वर्मा, दिल्ली
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